Sunday, 7 July 2013

बहुत जद्दोजहद है

तुम्हारे लिए प्यार के 
मायने क्या हैं ?
मैं इस बहस में ,
कभी शामिल नहीं हूँ .
मेरे लिए प्यार ,
शाख पर लरजती हुई ,
कोमल पत्ती की तरह है ,
जो कि ,
शाख पर लग कर ,
खुद जीती है ,
और पेड़ में ,
प्राणों का संचार करती है .

प्यार कोई चिड़िया नहीं ,
नहीं वह कोई ,
खूबसूरत दस्तकारी .
प्यार कोई वस्तु नहीं ,
नहीं वह कोई ,
रसीली कलमकारी .
प्यार मधुर भावनाओं का ,
जीवंत स्पंदन ,
स्वयं चलता है ,
सुकोमल दिल के साथ ,
और,
कारवां जीवन का ,
हरदम साथ लिए चलता है . 

उलझ कर रह गया है ,
जीवन का अभिमन्यु ,
सत्ता के चक्रव्यूह में ,
फिर से दोहराया जाएगा ,
वही पौराणिक मिथक ,
जहां अंधों से दृष्टि वाले ,
अधिकारों को मांगेंगे ,
ऐसे में प्यार पर बहस ,
ठीक नहीं लगती .
ना जाने किस मोड़ पर ,
मैं प्यार को ,
साकार देखूंगा ,
अभी तो बहुत जद्दोजहद है ,
जीवन के समर में .


-त्रिलोकी मोहन पुरोहित , राजसमन्द.

No comments:

Post a Comment