Monday, 29 August 2011

संवाद के लिए , मुलाक़ात तो करें.

दूर क्यों खड़े , आओ बात तो  करें.
संवाद के लिए , मुलाकात तो करें.

सूनी - सूनी सांज,
उदास  है   प्रभात ,
दिग्भ्रमित है दिन ,
बर्फ  सी   है   रात .

मौन क्यों रहें ,आओ बात तो तो करें .
संवाद के  लिए , मुलाक़ात   तो  करें.

उलजनों की डोर,
गुच्छ   सी    बनी,
सब प्रयास विफल ,
गुत्थियां      तनी   .

हठ   क्यों   करें , आओ  बात तो करें .
संवाद के  लिए , मुलाक़ात  तो करें.

कागज की सही ,
छोटी  नाव तो तिराएँ ,
गीली रेत के सहारे ,
कुछ अपना बनाएं ,

विवाद क्यों करें  , आओ बात  तो करें ,
संवाद के  लिए , मुलाक़ात   तो   करें .
                                                                                                                                                                              

3 comments:

  1. मेरे प्रिय गीतों में से एक गीत। बहुत दिनों के बाद राजनगर के उन दिनों की याद आ गई जब आपके मुख से ये गीत सुना करते थे।मेरे प्रिय गीतों में से एक गीत। बहुत दिनों के बाद राजनगर के उन दिनों की याद आ गई जब आपके मुख से ये गीत सुना करते थे।

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