Saturday, 6 September 2014

मौन की भाषा



मौन की भाषा का भी
अपना व्याकरण
होता ही होगा,
उसी व्याकरण के
आधार पर 
आँखें पढ़ लेती होंगी
मौन अभिव्यक्ति के संदेश ?
मैंने भेजें हें संदेश
मौन के बल पर
(भाव-भंगिमाओं के साथ भी )
लेकिन आजतक नहीं आया
उधर से कोई प्रत्युतर
शायद मौन की भाषा को
गढ़ने का भी होता होगा
कोई छंदानुशासन या विधान।
हँसता हूँ आज स्वयं पर
मैंने भी क्या खूब गढ़ी
मौन की भाषा
उम्र चुकती गयी
किसी अल्हड़ नदी की तरह
संदेश उधर से प्रत्युतर मेँ
लौट कर आया ही नहीं
जैसे बहा हुआ नदी का पानी
पलट कर उद्गम स्थल तक
नहीं आता कभी
अब मौन की भाषा
मेरे लिए तो
विचारणा का विषय हो गया।
कभी-कभी भोजपत्रों पर अंकित
शिकायत और प्रेमपत्र
मौन के गढ़े संदेशों की
हंसी उड़ाते अनुभव होते हैं,
कभी-कभी मौन मेँ
गढ़े संदेशे भी
इतिहास मेँ कुछ पृष्ठ
अपने नाम करते हैं
चलो मित्रों !
“कौन किस पर भारी”
इस बहस को विराम दे दें
लेकिन मिलकर
मौन के व्याकरण को
तय करते हैं
क्योंकि मुझ सहित
तमाम कवितावादियों की उम्र
मौन के आधार पर व्यर्थ जाती है
उधर से कोई संदेश जो नहीं आया।
- त्रिलोकी मोहन पुरोहित, राजसमंद (राज॰)

No comments:

Post a Comment