Tuesday, 21 August 2012

फलक


दुनिया के फलक पर ,
फैला दिए हैं उस ने ,
कुछ चित्ताकर्षक रंग ,
कुछ अनाकर्षक रंग .

मेरे पार्श्व में बिखरे हैं ,
कुछ ऐसे ऐसे भद्दे रंग ,
जिन्हें देखने भर में ही,
होता है अपार कष्ट ,और,
सोचता हूँ ,आखिर कर ,
उस ने ,इन भद्दे रंगों को
क्यों कर बिखेरा होगा  ?
शायद,
इसमें भी मिला होगा उसे
कुछ तो आनन्द का हेतु .

दूर-दूर तक छितराए ,
भद्दे भूरे , मटमैले रंगों के,
बीचों बीच डाल दिए हैं
कुछ सुनहरे-रजत के छींटे.
भद्दे  रंग रोज ही गाढे हो कर ,
और ज्यादह भद्दे और भद्दे ,
होते चले जाते हैं .
सुनहरे -रजत के छींटे ,
उस से भी तेज,
गाढ़े , मोटे और परतदार,
होते चले जाते हैं ,
जैसे उन में ठनी है प्रतिस्पर्धा.

कई चित्र उकेर दिए हैं ,
पर्वत , पठार , मैदान हैं ,
वन ,उपवन , नदी, नाले,
हरी भरी घाटियाँ और ,
फैले हुए मरुस्थल हैं ,
कुछ भरे-पूरे हैं ,
कुछ एकदम नग्न ,
कितनी विचित्र उस की
बिखरी हुई रंगोली है.
शायद
इसमें भी मिला होगा उसे ,
कुछ तो आनन्द का हेतु.

मैं फलक पर जहां हूँ ,
वहां रंग अच्छे भी हैं ,
और , रंग भद्दे भी हैं ,
कुछ कम तो कुछ ज्यादह ,
मैं इन्हें सहर्ष स्वीकारता हूँ ,
क्यों कि ,
उसने दिए हैं जो भी रंग ,
बहुत प्यार से दिए हैं ,
उन्हें स्वीकार करने में ,
मेरी कोई विवशता भी नहीं है .
बस चाहता हूँ , वह मेरे हाथों को ,
कुछ  लम्बे और मजबूत कर दे  ,
जिससे उस के फलक पर ,
अपने आसपास , फैला सकूं ,
कुछ सुनहरे और रजत रंग.


2 comments:

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  2. World on canvas
    He has spread,
    Some flashy colors,
    Some iridescent colors.

    Are dispersed into my side;
    Some such livid;
    In the long view,
    Suffering is immense, and,
    I think, ultimately,
    That said, these ugly colors
    Why would scatter?
    Probably,
    He also got
    Something for fun.

    Away - far diffuse,
    Dirty brown, beige colors,
    Laid down the middle
    Some golden - silver splatter.
    Livid be thicker every day,
    And much dull and ugly,
    There they go.
    Golden - silver splatter,
    Faster than that,
    Thick, thick and flaky,
    There they go,
    As competition among them is embattled.

    Uker have many pictures,
    Mountains, plateaus, plains,
    Forests, parks, rivers, streams,
    Green valleys and,
    Desert spread are
    Some full - all are
    Some quite naked,
    How strange that
    Rangoli is scattered.
    Maybe
    It also got him,
    Something for fun.

    While I'm on board;
    The colors are
    And, the colors are ugly,
    much some less so,
    I'll accept it gladly,
    Why is that,
    He has given the color,
    Have a lot of love,
    To accept them,
    I do not have any compulsion.
    Just want my hands;
    Give some taller and stronger,
    On the face of it,
    Around you, so that spread,
    Some golden and silver colors.

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