Sunday, 27 January 2013

मैं धरा का पुत्र हूँ धरा पर पला हूँ .


रोशनी सूरज से लिए मैं चला हूँ .
मैं धरा का पुत्र हूँ धरा पर पला हूँ .

छल-छंद सारे ,
जानता हूँ ,
मैं निशा के.
षड्यंत्र सारे ,
जानता हूँ ,
मैं निशा के .

अंधेरों को दफन करता मैं बढ़ा हूँ.
मैं धरा का पुत्र हूँ धरा पर पला हूँ .

छलकते प्याले
जानता हूँ ,
मैं मधु के .
टूटते प्याले ,
जानता हूँ ,
मैं मधु के .

भोर से संध्या तक गंगा में बहा हूँ .
मैं धरा का पुत्र हूँ धरा पर पला हूँ .

प्यार-रिश्ते ,
जानता हूँ ,
मैं मृदा के .
कर्ज-अनुग्रह ,
जानता हूँ ,
मैं मृदा के .

मृदा से संसार अपना गढ़ रहा हूँ .
मैं धरा का पुत्र हूँ धरा पर पला हूँ .


                  - त्रिलोकी मोहन पुरोहित , राजसमन्द.

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