Thursday, 15 September 2011

एक और समझोता

सब्जी की दुकान पर ,
सब्जी लेती महिला ने,
दुकानदार से कहा-
भाई साहब भिन्डी देदो,
भिन्डी उठाते हुए  पूछा -
ज़रा भाव तो बता दो .

सब्जी वाला भाई बोला -
बहिन जी आपके लिए,
ज्याद नहीं बताउंगा,
मात्र  अस्सी रुपया किलो ,
महिला के हाथ से ,
छूट गयी भिन्डी .

हतप्रभ सी देखती है,
साश्चर्य कहती है-
भाई साहब मुझे लोकी ही देदो,
लोकी लेती है,
और -
अपनी जिंदगी के ,
 समझोते की सूची में,
एक और समझोता  जोड लेती है,

एक अरसे से उस के घर,
माखन नहीं आता है,
तैल भी हो गया बहुत कम ,
बच्चे करते हैं सवाल ,
तब सधी हुई मास्टरनी जी 
की तरह देती है जवाब ,
ये सब बढ़ा  देते हैं ,
केलोस्ट्रोल हमारे शरीर में ,
परन्तु,
उलजा हुआ  है उसका मन-मस्तिस्क,
सब्जी मे  समझोते का,
अब क्या देगी जवाब ?



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