देवता बन जाने के लिए

मेरे लिए 
मेरा घर
मंदिर है 
आते-जाते लोग 
देवता हैं 
तुम दूर रहकर
क्या पा लोगे? 
जरा मेरे 
घर की ओर बढ़ो 
देवता बन जाने के लिए।

- त्रिलोकी मोहन पुरोहित, राजसमन्द ( राज)

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