Friday, 2 December 2011

सुदूर से आता हुआ , घर्र-घर्र नाद उठा ,

सुदूर से आता हुआ , घर्र-घर्र नाद उठा ,
              देखा आंजनेय ने , सैन्य - दल आता  है.
अग्र भाग गज-दल  , पश्च भाग अश्व - दल ,
              मध्य भाग भव्य-रथ , वेग सह आता है.
मृग एक दौड़ कर , दुखिया के अंक सटा ,
              शिशु मानो मातृ-अंक ,चढ़ा चला आता है.
 भय मारे भागते हैं, भोले - भाले वन्य जीव ,
              छिपते हैं जीव मानो ,ध्वंस चला आता है
             
सैन्य दल फैल गया , चक्राकार रचना में ,
                भव्य रथ रुक गया , दशग्रीव आया है.
ले के साथ नारियों को , आगे कर मंदोदरी ,
                छैला - रूप धर कर , हतबुद्धि आया है.
बुद्धिमंत हनुमान , शीघ्र ही समझ गये ,
                जानकी से मिलने को,मंदबुद्धि आया है.
सती सीता मुंह फेर , करुण विलाप करे ,
                 हाय ! राम शीघ्र करो , शठबुद्धि आया है.
                
हुआ सम्मुख लंकेश , सती से यूँ कहता है ,   
                  मुझ को स्वीकार करो , रक्ष-रानी  बन जा.
मेरे साथ पार्श्व-बैठ , सिंहासन कृतार्थ करो , 
                  वैभव तुम्हारा  होगा , राज-रानी बन जा .
भूत अब भूल जाओ , वर्तमान सम्मुख है,
                   भविष्य भी यही तय , भव-रानी बन जा.
देव-नर-नाग सब , हैं मेरे यहाँ तत्पर ,
                   सबको आदेश देना , पट-रानी बन जा.
         
        

No comments:

Post a Comment