Saturday, 24 November 2012

मुक्ति मिलती .


आज के हाइकू -
=============

खिड़की खोली ,
है धूप गुनगुनी ,
मुक्ति मिलती .
******************
शाखा हिलती ,
नर्म धूप झूलती ,
मुक्ति खिलती .
******************
धूप दौड़ती,
लहरों पर चढ़ ,
मुक्ति बढ़ती.
******************
गर्द फैल के ,
नर्म धूप रोकती,
मुक्ति मरती .
******************
पौर-पौर पे ,
धूप के छोने बैठे,
मुक्ति सजती.
******************
                         - त्रिलोकी मोहन पुरोहित.

No comments:

Post a Comment