आज के हाइकू - मन पतंग



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चढ़ती जाये ,
आशा की डोर लिये,
मन पतंग .

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होती नवीन ,
आशा के बाजारों में ,
मन पतंग .

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खूब चिढ़ाती ,
इठलाती दिखती ,
मन पतंग .

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कट जाती है ,
खुले पेंच लगाती,
मन पतंग.

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घर के आगे ,
वे धरी रह गयी ,
मन पतंग .

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समय लिये ,
चिंदी हुई रखी है,
मन पतंग.

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