Sunday, 25 March 2012

जल की करे तलाश .

मधुरा गोरी खाली घट ले, जल की करे तलाश .
रंग कुसुम्भी रखने वाला, सूख गया रे पलाश .

सूख गए हैं ताल-तलैया
फटी बिवाई  सी  धरती .
किसना हाथ धरे बैठा है
क्यों  नहीं  मेह बरसती .

ऋतुएँ सब ऐसे ही बीते, मौसम ने किया निराश . 
मधुरा गोरी खाली घट ले जल  की करे तलाश .

नित्य नया उद्घोषक बोले
गरज के वर्षा होगी आज.
कहीं पर छींटे तेज गिरेंगे
कहीं गिरेगी भारी गाज .
पर नहीं देखता चोकी पर, वो खाली धरा गिलास.
मधुरा गोरी खाली घट ले जल की करे तलाश .

ठूंठ हुए वृक्षों पर बैठे ,
अब गें-गें करे मयूर ,
वे धैर्य दिलाते कहते,
आयेंगे जलद जरूर .
रंग कुसुम्भी खिल जाएगा सज जाएगा आकाश .
मधुरा गोरी खाली घट ले जल  की करे तलाश .  


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