Tuesday, 6 March 2012

मेरे आँगन में होली पर 
उतर आये इन्द्रधनुष ,
इसलिए मेरे घर पर ,
जरूर आना मित्र ,
मुझे प्रतीक्षा रहेगी .


घर पर बनाई है ,
पसंद की मिठाइयां ,
कुरकुरी नमकीन ,
मिल बैठेंगे मेरे यार ,
खायेंगे और -
थोड़ी सी कर लेंगे 
गली के खिलंदड ,
छोरों के साथ धमाल .


यही तो एक अवसर है ,
संबंधों को लाल रंग में ,
तरबतर करने का ,
आयेगा न , मुझे प्रतीक्षा है.


मैं जानता हूँ तेरा शहर ,
मेरे शहर से ज़रा दूर है ,
फिर भी तुझे आएगी , 
मेरी याद . 


तुझे याद है ना ,
होली के ही दिन ,
हमने शर्मा जी को उठा कर ,
पानी की प्याऊ में ,
खूब डुबोया था,
वो भी याद होगा ,
शर्मा चाची ने दी थी ,
दनादन गालियाँ .


शर्मा जी से मिल लें ,
उनके चरणों में,
धीरे  से बिछा देंगे, 
श्रद्धा का पीत रंग.


देख तू रोना नहीं ,
एक खबर देता हूँ ,
आजकल चाचा,
बिल्कुल अकेले हैं.


हाँ , एक बात और ,
याद होगी तुझे भूरा की ,
हाँ - हाँ ,वही भूरा ,
जो हमारे लिए ,
अपना काम छोड़ ,
गड़ दिया करता था ,
गिल्ली -डंडा और बल्ला,
हाँ वही भूरा ,
शहर में गया था कमाने ,
और , 
मेट्रो के नीचे ,
खो आया अपने पैर .


तू आजाये तो ,
भूरा का दर्द , 
ज़रा  कम होगा ,
दे नहीं सकते पैर ,
परन्तु ,दे ही आयेंगे ,
बैसाखी का एक जोड़ा  .
इस होली पर ,
उसके उदास कपोलों पर,
मल आयेंगे  , 
प्यार का मनचाहा रंग .


मुझे मालूम है -
मेरी इन बातों से ,
उदास जरूर होगा ,
पर खुश-खुश ले आयेगा ,
प्यार का रंग ,
और -
सजेगा मेरे आँगन में ,
कई सालों बाद इन्द्रधुनुष.










  
  

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