Sunday, 9 December 2012

शीत रूपसी .

धवल वेश 
रजत रूप धर,
शीत रूपसी .
थरथर कम्पन ,
प्रीत रूपसी .

नर्म धूप की ,
स्वर्णिम चादर ले ,
शीत षोडशी,
धीरे से आती-जाती,
सजी षोडशी.

संध्या वेला की ,
श्यामल गलियों में ,
शीत रूपसी ,
देखा तमस चढ़ा ,
भीत रूपसी .

- त्रिलोकी मोहन पुरोहित. राजसमन्द ( राज.) 

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