एक कोना है रिक्त सा तेरा भी मेरा भी I

एक कोना है रिक्त सा तेरा भी मेरा भी I
कब भरेगा रिक्त कोना तेरा भी मेरा भी II
पूछ लेते पता तब ही सही समय के रहते I
क्या कुछ कम हो जाता तेरा भी मेरा भी II
हम हैं आमने सामने मध्य में बहती नदी I
बस हाथ फैला रह गया तेरा भी मेरा भी II
इस उफनती नदी में भी उतर जाएं आज ही I
देख कैसे धड़कता दिल तेरा भी मेरा भी II
नित्य ही कब उफनती है न सूखती है वो नदी I
नित्य दिन कब बुरा होता तेरा भी मेरा भी II
जुदा रहने पर क्या मिला सोच ही लेते कभी।
हर बार बिखर जाता घर तेरा भी मेरा भी II
अब भी है ज़िंदा उम्मीद अच्छा हो जाने की I
इक नया किरदार आया तेरा भी मेरा भी II
रूह कभी अलग हुई जो आज होगी यहाँ I
अच्छा है महलों से घर तेरा भी मेरा भी II
हम बँट ही नहीं सकते रहते दरारों के भी I
प्यार में लकदक है गाँव तेरा भी मेरा भी II
-त्रिलोकी मोहन पुरोहित, राजसमन्द (राज)

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